Vyāsa’s Counsel to Dhṛtarāṣṭra on Restraining Duryodhana (व्यास-धृतराष्ट्र-उपदेशः)
इन्द्रोडप्यश्रुनिपातेन सुरभ्या प्रतिबोधित: । अन्यै: समृद्धैरप्यर्थर्न सुतान्मन्यते परम्,सुरभिने पुत्रके लिये आँसू बहाकर इन्द्रको भी यह बात समझायी थी, जिससे वे अन्य समृद्धिशाली पदार्थोंसे सम्पन्न होनेपर भी पुत्रसे बढ़कर दूसरी किसी वस्तुको नहीं मानते हैं
涙の落ちるそのさまによって、スラビーはインドラに悟りを促した。ゆえに、いかに他の富が満ちていようとも、彼は子に勝るものを他に認めなかった。
व्यास उवाच