Pulastya’s Tīrtha Enumeration: Sarasvatī, Naimiṣa, Gayā, and Associated Phalaśruti
Chapter 82
घुलस्त्य उवाच हन्त ते कथयिष्यामि यदृषीणां परायणम् | तदेकाग्रमना: पुत्र शृणु तीर्थेषु यत् फलम्,पुलस्त्यजीने कहा--वत्स! तीर्थयात्रा ऋषियोंके लिये बहुत बड़ा आश्रय है। मैं इसके विषयमें तुम्हें बताऊँगा। तीर्थोंके सेवनसे जो फल होता है, उसे एकाग्र होकर सुनो
プラスタは言った。「よい、我は汝に語ろう。これはリシたちの拠り所とされるものだ。子よ、心を一つにして聴け。ティールタに参じ、これを奉ずることの果報を。」
घुलस्त्य उवाच