Pulastya’s Tīrtha Enumeration: Sarasvatī, Naimiṣa, Gayā, and Associated Phalaśruti
Chapter 82
गोसहस्रफलं तस्य स्वर्गलोकं च विन्दति । प्रभया दीप्यते नित्यमग्निवद् भरतर्षभ,तदनन्तर सरस्वती और समुद्रके संगममें जाकर स्नान करनेसे मनुष्य सहस्र गोदानका फल और स्वर्गलोक पाता है। भरतश्रेष्ठ! वह पुण्यात्मा पुरुष अपने तेजसे सदा अग्निकी भाँति प्रकाशित होता है
その者は千頭の牛を施す果報と天界とを得る。バラタ族の雄牛よ、彼は自らの光輝によって、火のように常に燃え輝く。
घुलस्त्य उवाच