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Shloka 35

Adhyāya 76: Kuṇḍina-praveśaḥ, Bhīmena satkāraḥ, Ṛtuparṇa-kṣamā, Aśvahṛdaya-pratyarpanam

Nala’s Reception and Reconciliation

एते देवास्त्रय: कृत्स्नं त्रैलोक्यं धारयन्ति वै । विल्लुवन्तु यथा सत्यमेतद्‌ देवास्त्यजन्तु माम्‌,ये पूर्वोक्त तीन देवता सम्पूर्ण त्रिलोकीको धारण करते हैं। मेरे कथनमें कितनी सचाई है, इसे देवतालोग स्वयं स्पष्ट करें। यदि मैं झूठ बोलती हूँ तो देवता मेरा त्याग कर दें

「この三柱の神々こそ、まことに三界すべてを支えておられる。わが言葉の真実がいかほどか、神々みずから明らかにせよ。もし我が偽りを語るなら、神々よ、我を見捨てたまえ。」

बृहदश्चव उवाच