Sudeva Identifies Damayantī in Cedi (सुदेवेन दमयन्ती-परिचयः)
रत्नराशिविंशीर्णो<यं गृह्नी ध्वं कि प्रधावत । उस समय वहाँ तीनों लोकोंको भयमें डालनेवाला महान् आर्तनाद एवं चीत्कार हो रहा था। कोई कहता--'अरे! इधर बड़े जोरकी आग प्रज्वलित हो उठी है। यह भारी संकट आ गया (अब) दौड़ो और बचाओ।' दूसरा कहता--“अरे! ये ढेर-के-ढेर रत्न बिखरे पड़े हैं, इन्हें सँभालकर रखो। इधर-उधर भागते क्यों हो?”
bṛhadaśva uvāca | ratnarāśi-viṃśīrṇo 'yaṃ gṛhṇīdhvaṃ kiṃ pradhāvata |
ブリハダシュヴァは言った。「ここに宝玉の山が散らばっている—集めよ!なぜ右往左往して走り回るのだ?」その時、三界をも震え上がらせるほどの大いなる号泣と騒擾が起こった。ある者は叫んだ。「ああ!ここで猛火が燃え上がった—大厄災だ!走って救え(救えるものを)!」またある者は叫んだ。「見よ—宝玉が山と散り伏している。確保して守れ!なぜあちらこちらへ逃げ惑うのだ?」
बृहदश्चव उवाच