Damayantī’s Lament, Serpent-Seizure, Rescue by the Hunter, and the Curse
बृहत्सेने व्रजामात्यानानाय्य नलशासनात् | आचक्ष्व यद्धृतं द्रव्यमवशिष्टं च यद् वसु,(दमयन्तीने उससे कहा)--“बृहत्सेने! तुम मन्त्रियोंक पास जाओ तथा राजा नलकी आज्ञासे उन्हें बुला लाओ। फिर उन्हें यह बताओ कि अमुक-अमुक द्रव्य हारा जा चुका है और अमुक धन अभी अवशिष्ट है!
ダマヤンティーは彼女に言った。「ブリハツェナーよ、諸大臣のもとへ行き、ナラ王の命として彼らをここへ連れて来なさい。そして、どの財がすでに失われ、どの富がなお残っているかを告げるのです。」
बृहृदश्चव उवाच