Sāvitrī-Upākhyāna: Dyumatsena’s Restoration and the Return to Kāmyaka
Conclusion
यदि तावदनुद्युक्त: शेते कामसुखात्मक: । नेतव्यो वालिमार्गेण सर्वभूतगतिं त्वया,“यदि वह विषयसुखमें ही आसक्त हो सीताकी खोजके लिये कुछ उद्योग न कर रहा हो तो उसे भी तुम वालीके मार्गसे उसी लोकको पहुँचा देना, जहाँ एक-न-एक दिन सभी प्राणियोंको जाना पड़ता है
「もし彼がなお奮い立たず、欲楽に耽って寝そべっているだけなら、ヴァーリーの道を歩ませよ。すなわち、いずれ万有の生きものが到るその界へと、彼を送り届けよ。」
मार्कण्डेय उवाच