Mārkaṇḍeya’s Consolation to the King: Exempla of Rāma and the Efficacy of Allies (मार्कण्डेयाश्वासनम्)
दशग्रीवश्व दैत्यानां देवानां च बलोत्कट: । आक्रम्य रत्नान्यहरत् कामरूपी विहड्भगम:,बलोन्मत्त रावण इच्छानुसार रूप धारण करने और आकाशमें भी चलनेमें समर्थ था। उसने दैत्यों और देवताओंपर आक्रमण करके उनके पास जो रत्न या रत्नभूत वस्तुएँ थीं, उन सबका अपहरण कर लिया
十の首をもつラーヴァナは、神々にもダイティヤにも勝る剛力を備え、意のままに姿を変え、虚空をも行き来することができた。力に酔いしれた彼は神々とダイティヤを襲い、彼らの持つ宝玉や貴重な品々をことごとく奪い去った。
मार्कण्डेय उवाच