द्वैतवनगमनम् (Dvāitavana-gamanam) — Journey and Settlement at Dvaita Forest-Lake
यथाप्रतिज्ञं च महानुभाव कृच्छूं वने वासमिमं निरुष्य । ततः श्रियं तेजसा तेन दीप्ता- मादास्यसे पार्थिव कौरवेभ्य:,महानुभाव नरेश! तुम अपनी प्रतिज्ञाके अनुसार इस कष्टसाध्य वनवासकी अवधि पूरी करके कौरवोंके हाथसे अपनी तेजस्विनी राजलक्ष्मीको प्राप्त कर लोगे
マールカンデーヤは言った。「大いなる威徳を備えた王よ。汝は誓いのとおり、この苦難の林住を耐え抜き、期限を満たすであろう。そののち、パールタよ、汝はカウラヴァらの手から、汝のテージャスにより輝く王権の吉祥(シュリー)を取り戻すのだ。」
मार्कण्डेय उवाच