Mudgalasya Svarga-nirvedaḥ
Mudgala’s Disenchantment with Heaven
चित्रसेन उवाच पापो<यं नित्यसंतुष्टो न विमोक्षणम्हति । प्रलब्धा धर्मराजस्य कृष्णायाश्न धनंजय,चित्रसेनने कहा--धनंजय! यह पापी सदा राज्यसुख भोगनेके कारण हर्षसे मतवाला हो उठा है; अतः इसे छोड़ना उचित नहीं है। इसने धर्मराज युधिष्ठिर तथा द्रौपदीको धोखा दिया है
チトラセーナは言った。「ダナンジャヤよ。この罪深き者は、常に王権の快楽に酔いしれ、驕り高ぶっている。ゆえに解放に値しない。彼はダルマラージャ・ユディシュティラと、クリシュナー(ドラウパディー)を欺いたのだ。」
चित्रसेन उवाच