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Shloka 22

दुर्योधनस्य प्रायोपवेशः — शकुनिसान्त्वनम् तथा कृत्याह्वानम्

Duryodhana’s Fast: Śakuni’s Consolation and the Summoning of a Kṛtyā

उपायो<यं मया दृष्टो गमनाय निरामय: । अनुज्ञास्यति नो राजा बोधयिष्यति चाप्युत,'द्वैतवनमें जानेका यह उपाय मुझे सर्वथा निर्दोष दिखायी दिया है। इसके लिये राजा धृतराष्ट्र हमें अवश्य आज्ञा दे देंगे और वहाँ जाकर हमें क्या-क्या करना चाहिये--इसके विषयमें कुछ समझायेंगे भी

シャクニは言った。「我は出立の策を見いだした。安らかで、咎められるところのない道だ。王ドリタラーシュトラは必ず我らに許しを与え、さらに、そこへ赴いたのち何をなすべきかも教え示してくださるであろう。」

वैशम्पायन उवाच