चित्रसेन-समागमः / The Engagement with Citrasena and the Gandharvas
अतिरस्कृतसम्भाषा दुःस्त्रियो नानुसेवती | अनुकूलवती नित्यं भवाम्यनलसा सदा,“मैं कोई ऐसी बात मुँहसे नहीं निकालती, जिससे किसीका तिरस्कार होता हो। दुष्ट स्त्रियोंके सम्पर्कसे सदा दूर रहती हूँ। आलस्यको कभी पास नहीं आने देती और सदा पतियोंके अनुकूल बर्ताव करती हूँ
わたしは、誰かを侮りのうちに落とすような言葉を、決して口にいたしません。悪しき女たちとの交わりを常に遠ざけ、怠け心を近づけず、つねに夫君たちの御心にかなうように振る舞っております。
वैशम्पायन उवाच