Skanda–Svāhā-saṃvāda; Gaṇa-vyutpatti and Śvetaparvata-vaibhava
Chapter 220
यस्तु विश्वस्य जगतो बुद्धिमाक्रम्य तिष्ठति । त॑ प्राहुरध्यात्मविदो विश्वजिन्नाम पावकम्,(बृहस्पतिके तीसरे पुत्रका नाम “विश्वजित' है) वे सम्पूर्ण विश्वकी बुद्धिको अपने वशमें करके स्थित हैं, इसीलिये अध्यात्मशास्त्रके दिद्वानोंने उन्हें 'विश्वजित” अग्नि कहा है
全宇宙の知慧を制して揺るがずに立つその火は、アディヤートマ(内なる霊性)の学に通じた者たちによって「ヴィシュヴァジト(Viśvajit)」—「世界を征する者」と呼ばれる。万有の知を己が支配に収めたゆえである。
मार्कण्डेय उवाच