Adhyāya 22: Śālva’s Weapon-Shower, Dāruka’s Wounding, and the Māyā-Report of Vasudeva’s Father
शरांश्षाशीविषाकारानूर्ध्वगांस्तिग्मतेजस: । प्रैषयं शाल्वराजाय शार्ज्रमुक्तानू सुवासस:,तत्पश्चात् शार्ड़् धनुषसे छूटे हुए विषैले सर्पोंके समान प्रतीत होनेवाले, सुन्दर पंखोंसे सुशोभित, प्रचण्ड तेजस्वी तथा अनेक ऊर्ध्वगामी बाण मैंने राजा शाल्वपर चलाये
そののち我は、毒蛇のごとく見える鋭烈な矢を幾筋も、天へと突き上がる勢いで、麗しき羽を備え、猛き光を放ちながら、シャールヴァ王めがけて放った。
वायुदेव उवाच