Skanda–Mātṛgaṇa-janma: Kumārakāḥ, Kanyāgaṇāḥ, and the Vīrāṣṭaka (स्कन्द-मातृगण-सम्भवः)
भूतेष्वभावं संचिन्त्य ये तु बुद्धे: परं गता: । न शोचन्ति कृतप्रज्ञा: पश्यन्त: परमां गतिम्,संसारके सभी पदार्थ अनित्य हैं, ऐसा सोचकर जो बुद्धिसे पार होकर परब्रह्म परमात्माको प्राप्त हो गये हैं वे ज्ञानी महापुरुष परमात्माका साक्षात्कार करते हुए कभी शोकमें नहीं पड़ते
万有の無常を思惟し、知性の彼岸へと至って最高の境地に達した者たち——成就した智慧を備え、至高の帰趣を見定める賢者は——決して嘆かない。
व्याध उवाच