अग्निवंशवर्णनम् (Agni-vaṃśa-varṇana) / The Genealogy and Function of Agni
व्याध उवाच भूमिरापस्तथा ज्योतिर्वायुराकाशमेव च । गुणोत्तराणि सर्वाणि तेषां वक्ष्यामि ते गुणान्,धर्मव्याधने कहा--ब्रह्मन! पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश--े सब पूर्व- पूर्ववाले तत्त्व अपनेसे उत्तर-उत्तरवालोंके गुणोंसे युक्त हैं। मैं उनके गुणोंका वर्णन करता हूँ
狩人は言った。「おお、婆羅門よ。地・水・火・風・虚空――この五大は順次、後に続く元素の性質をも併せ持つ。今、汝にそれらの性質を説こう。」
व्याध उवाच