अग्निवंशवर्णनम् (Agni-vaṃśa-varṇana) / The Genealogy and Function of Agni
लोके विततमात्मानं लोक॑ चात्मनि पश्यति । परावरज्ञो यः शक्त:ः स तु भूतानि पश्यति,वह सम्पूर्ण लोकोंमें अपनेको व्याप्त और अपनेमें सम्पूर्ण लोकोंको स्थित देखता है। इस प्रकार जो निर्गुण ब्रह्मको जाननेवाला समर्थ ज्ञानी पुरुष है, वह सम्पूर्ण भूतोंको आत्मरूपसे देखता है
「彼は、自己(アートマン)が世に遍満するのを見、また世のすべてが自己のうちに住するのを見る。上と下(勝劣)を知り、その力を具える智者こそ、あらゆる生類を観ずる者である。」
व्याध उवाच