Adhyāya 208: Aṅgirasī-kanyāḥ
Enumeration of Aṅgiras’ daughters and attribute-names
कृषिगोरक्ष्यवाणिज्यमिह लोकस्य जीवनम् । दण्डनीतिस्त्रयी विद्या तेन लोको भवत्युत,कृषि, गोरक्षा, वाणिज्य, दण्डनीति और त्रयीविद्या--ऋक्, यजु, सामके अनुसार यज्ञादिका अनुष्ठान करना और कराना ये लोगोंकी जीविकाके साधन हैं। इनसे ही लौकिक और पारलौकिक उन्नति सम्भव होती है
व्याध उवाच