पञ्चमहाभूतगुण-इन्द्रियनिग्रह-उपदेशः | Teaching on the Qualities of the Five Elements and Sense-Control
तस्य प्रीत: स भगवान् साक्षाद् दर्शनमेयिवान् | दृष्टवैव चर्षि: प्रह्वस्तं तुष्टाव विविधै: स्तवै:,उनकी तपस्यासे प्रसन्न होकर भगवानने उन्हें प्रत्यक्ष दर्शन दिया। उनका दर्शन पाते ही महर्षि नम्नतासे झुक गये और नाना प्रकारके स्तोत्रोंद्वारा उनकी स्तुति करने लगे
その苦行に満悦した主は、みずから現れて直に拝謁を許した。御姿を見た大聖仙は、恭しく身をかがめ、さまざまな讃歌をもって主を讃えはじめた。
मार्कण्डेय उवाच