Kṛṣṇasya asāṃnidhya-kāraṇaṃ — Śālva–Soubha-vṛttāntaḥ
Why Kṛṣṇa was absent; the Śālva and Saubha account
उदपाना: कुरुश्रेष्ठ तथैवाप्यम्बरीषका: । समन्तात् क्रोशमात्रं च कारिता विषमा च भू:,कुरुश्रेष्ठ! द्वारकापुरीके चारों ओर एक कोसतकके चारों ओरके कुएँ इस प्रकार जलशून्य कर दिये गये थे मानो भाड़ हों और उतनी दूरकी भूमि भी लौहकण्टक आदिसे व्याप्त कर दी गयी थी
クル族の最勝者よ。都の四方一クロ―シャの範囲にある井戸や小さな貯水は、まるで空の器のようにことごとく涸らされ、さらにその地は鉄の棘など鋭い障害で満たされて、敵の接近を阻んだ。
वायुदेव उवाच