Bhīmasena–Hanūmān Saṃvāda: The Tail Test and the Divine Path
नकुलं सहदेवं च न मोक्ष्यति युधिष्ठिर: । कथं तु कुसुमावाप्ति: स्याच्छीघ्रमिति चिन्तयन्,मतवाले हाथीके समान ही उनकी लाल-लाल आँखें थीं। वे समरभूमिमें मदोन्मत्त हाथियोंको भी पीछे हटानेमें समर्थ थे। अपने प्रियतमके पार्श्वभागमें बैठी हुई यक्ष और गन्धर्वोकी युवतियाँ सब प्रकारकी चेष्टाओंसे निवृत्त हो स्वयं अलक्षित रहकर भीमसेनकी ओर देख रही थीं। वे उन्हें सौन्दर्यके नूतन अवतार-से प्रतीत होते थे। इस प्रकार पाण्डुनन्दन भीम गन्धमादनके रमणीय शिखरोंपर खेल-सा करते हुए विचरने लगे। वे दुर्योधनद्वारा दिये गये नाना प्रकारके असंख्य क्लेशोंका स्मरण करते हुए वनवासिनी द्रौपदीका प्रिय करनेके लिये उद्यत हुए थे। उन्होंने मन-ही-मन सोचा--“अर्जुन स्वर्गलोकमें चले गये हैं और मैं फूल लेनेके लिये इधर चला आया हूँ। ऐसी दशामें आर्य युधिष्ठिर कोई कार्य कैसे करेंगे? नरश्रेष्ठ महाराज युधिष्ठिर नकुल और सहदेवपर अत्यन्त स्नेह रखते हैं। उन दोनोंके बलपर उन्हें विश्वास नहीं है। अतः वे निश्चय ही उन्हें नहीं छोड़ेंगे, अर्थात् कहीं नहीं भेजेंगे। अब कैसे मुझे शीघ्र वह फूल प्राप्त हो जाय--यह चिन्ता करते हुए नरश्रेष्ठ भीम पक्षिराज गरुड़के समान वेगसे आगे बढ़े। उनके मन और नेत्र फूलोंसे भरे हुए पर्वतीय शिखरोंपर लगे हुए थे
vaiśampāyana uvāca | nakulaṃ sahadevaṃ ca na mokṣyati yudhiṣṭhiraḥ | kathaṃ tu kusumāvāptiḥ syāc chīghram iti cintayan |
ヴァイシャンパーヤナは語った。「ユディシュティラはナクラとサハデーヴァを行かせはしない。」ゆえにビーマは「どうすれば花を早く手にできるか」と思い巡らしつつ、花に満ちた山の峰々へ心と眼を据えて、迅速な決意のまま前へと押し進んだ。森に住むドラウパディーを喜ばせたい一心であり、同時にドゥルヨーダナの与えた苦難と、アルジュナが天界にある不在とを胸に刻んでいた。
वैशम्पायन उवाच
The verse highlights responsible leadership and familial duty: Yudhiṣṭhira, out of protective affection and prudence, will not risk sending Nakula and Sahadeva away; meanwhile, Bhīma’s ethical drive is expressed as determined service—seeking the flowers swiftly to honor and console Draupadī.
Vaiśampāyana narrates Bhīma’s inner reasoning: since Arjuna is away and Yudhiṣṭhira will not dispatch the younger brothers, Bhīma himself must secure the desired flowers quickly; he advances with focused urgency toward the flower-bearing heights.