सुरभि–इन्द्रसंवादः
Surabhi–Indra Dialogue as a Governance Exemplar
मैत्रेय उवाच नाहं वक्ष्यामि ते भूयो न ते शुश्रूषते सुत: । एष ते विदुर: सर्वमाख्यास्यति गते मयि,मैत्रेयजीने कहा--राजन्! तुम्हारा पुत्र मेरी बात सुनना नहीं चाहता, अतः मैं तुमसे इस समय फिर कुछ नहीं कहूँगा। ये विदुरजी मेरे चले जानेपर वह सारा प्रसंग तुम्हें बतायेंगे
マイトレーヤは言った。「王よ、そなたの子は我が言葉に耳を貸そうとしない。ゆえに今はこれ以上語らぬ。われが去ったのち、ヴィドゥラが一切の次第をそなたに告げよう。」
मैत्रेय उवाच