Udyoga Parva, Adhyāya 72 — Bhīmasena’s counsel on conciliation and Duryodhana’s disposition
तस्मिल्लोकपरित्यक्ते कि कार्यमवशिष्यते । हते दुर्योधने राजन् यदन्यत् क्रियतामिति,सब लोग दुर्योधनको अन्यायी समझकर त्याग देंगे और वह निन्दनीय होनेके कारण नष्टप्राय हो जायगा। उस दशामें आपका दूसरा कौन-सा कार्य शेष रह जाता है जिसे सम्पन्न किया जाय
世に見捨てられたなら、なお何をなすべきか。王よ、ドゥルヨーダナが討たれたなら、あとはなすべきことをなせばよい。
युधिछिर उवाच