Udyoga Parva, Adhyāya 72 — Bhīmasena’s counsel on conciliation and Duryodhana’s disposition
तथाशीलसमाचारे राजन् मा प्रणयं कृथा: । वध्यास्ते सर्वलोकस्य कि पुनस्तव भारत,राजन्! ऐसे कुटिलस्वभाव और खोटे आचरणवाले दुर्योधनके प्रति आप प्रेम न दिखावें। भारत! धृतराष्ट्रके वे पुत्र तो सभी लोगोंके वध्य हैं; फिर आप उनका वध करें, इसके लिये तो कहना ही क्या है?
王よ、そのように性根がねじれ、行いの卑しいドゥルヨーダナに情をかけてはならぬ。バーラタの裔よ、ドリタラーシュトラの子らは世の万人に討たれて然るべき者たちだ。ましてあなたが彼らを討つというなら、何をさらに言う必要があろうか。
युधिछिर उवाच