ह्वीरहता बाधते धर्म धर्मो हन्ति हत: श्रियम् श्रीहता पुरुषं हन्ति पुरुषस्याधनं वध:,नष्ट हुई लज्जा धर्मको नष्ट कर देती है। नष्ट हुआ धर्म मनुष्यकी सम्पत्तिका नाश कर देता है और नष्ट हुई सम्पत्ति उस मनुष्यका विनाश कर देती है, क्योंकि धनका अभाव ही मनुष्यका वध है
ユディシュティラは言った。「恥が失われれば、それはダルマを滅ぼす。ダルマが滅べば、繁栄が滅ぶ。繁栄が滅べば、その人自身が滅ぶ。財の欠乏こそ、人にとっての死だからだ。」
युधिछिर उवाच