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Shloka 20

Udyoga Parva Adhyaya 62 — Duryodhana’s Claim of Victory and Vidura’s Allegories on Discord and Risk

सर्वभूतहितो मैत्रस्तस्मान्नोद्विजते जन: । समुद्र इव गम्भीर: प्रज्ञातृप्त: प्रशाम्यति,जो सम्पूर्ण भूतोंका हित चाहनेवाला और सबके प्रति मैत्रीभाव रखनेवाला है, उससे किसी भी पुरुषको उद्वेग नहीं प्राप्त होता है। जो समुद्रके समान गम्भीर एवं उत्कृष्ट ज्ञानरूपी अमृतसे तृप्त है, वही परम शान्तिका भागी होता है

すべての生きものの益を願い、万人に友愛を抱く者—その人によって誰も心を騒がせない。海のごとく深く、勝れた智慧という甘露に満ち足りた者—その者こそ至上の寂静を得る。

विदुर उवाच