Udyoga-parva Adhyāya 3 — Sātyaki on Inner Disposition, Legitimacy, and Coercive Readiness
नाभ्यसूयामि ते वाक्यं ब्रुवतो लाज़लध्वज | ये तु शृण्वन्ति ते वाक््यं तानसूयामि माधव,अपनी ध्वजामें हलका चिह्न धारण करनेवाले मधुकुलरत्न! आप जो कुछ कह रहे हैं, उसमें मैं दोष नहीं निकाल रहा हूँ, जो लोग आपकी बातें चुप-चाप सुन रहे हैं, उन्हींको मैं दोषी मानता हूँ
鋤の印を旗に掲げるマーダヴァよ、あなたの語る言葉に私は咎を見いださぬ。だが、あなたの言葉を黙して聞く者どもこそ、私が責めるべき相手である。
वैशम्पायन उवाच