भीष्म–रामजामदग्न्ययुद्धप्रस्थानवर्णनम्
Bhishma’s Account of Parashurama’s Challenge and the March to Kurukshetra
ततस्तु लब्धसंज्ञो5हं ज्ञात्वा सूतमथाब्रुवम् । याहि सूत यतो राम: सज्जो5हं गतवेदन:,इतनेहीमें मुझे चेत हो गया और सब कुछ जानकर मैंने सारथिसे कहा--'सूत! जहाँ परशुरामजी हैं, वहीं चलो। मेरी पीड़ा दूर हो गयी है और अब मैं युद्धके लिये सुसज्जित हूँ"
tatastu labdhasaṁjño ’haṁ jñātvā sūtam athābruvam | yāhi sūta yato rāmaḥ sajjo ’haṁ gatavedanaḥ ||
やがて私は意識を取り戻し、起こったことを悟って御者に言った。「御者よ、ラーマ(パラシュラーマ)のいる所へ車を走らせよ。痛みは去った。今こそ戦いの支度は整った。」
भीष्म उवाच