भीष्म–जामदग्न्यसंवादः (Amba-prasaṅga and Kurukṣetra Dvandva Declaration) / Bhishma–Jamadagnya Dialogue
वे बाण वायुद्वारा उड़ाये हुए सर्पोकी भाँति परशुरामजीके शरीरमें धँसकर खून बहाते हुए चल दिये ।। क्षतजोक्षितसर्वाड़: क्षरन् स रुधिरं रणे । बभौ रामस्तदा राजन मेरुर्धातुमिवोत्सूजन्,राजन्! उस समय उनके सारे अंग लहूलुहान हो गये। जैसे मेरु पर्वत वर्षाकालमें गेरु आदि धातुओंसे मिश्रित जलकी धार बहाता है, उसी प्रकार उस रणभूमिमें अपने अंगोंसे रक्तकी धारा बहाते हुए परशुरामजी शोभा पाने लगे
kṣata-jokṣita-sarvāṅgaḥ kṣaran sa rudhiraṃ raṇe | babhau rāmas tadā rājan merur dhātum ivotsṛjan ||
その矢は風にあおられて蛇のようにうねり、パラシュラーマの身に深く食い込み、血をほとばしらせた。王よ、そのときラーマ(パラシュラーマ)の全身は傷に覆われ血に濡れたが、それでも戦場にあって彼は輝いて見えた――雨季の須弥山が鉱石の色を帯びた流れを注ぎ出すように、彼の四肢からも血の流れがほとばしったのである。
राम उवाच