उद्योगपर्व — अध्याय १४१: कर्ण–कृष्णसंवादः, उत्पात-स्वप्न-लक्षणानि
Karna–Krishna Dialogue: Omens and Dream-Signs
युद्धायापततस्तूर्ण वारितान् सव्यसाचिना । न तदा भविता त्रेता न कृत॑ द्वापरं न च,जब तुम देखोगे कि युद्धमें आचार्य द्रोण, शान्तनुनन्दन भीष्म, कृपाचार्य, राजा दुर्योधन और सिन्धुराज जयद्रथ ज्यों ही युद्धके लिये आगे बढ़े हैं त्यों ही सव्यसाची अर्जुनने तुरंत उन सबकी गति रोक दी है, तब तुम हक््के-बक्केसे रह जाओगे और उस समय तुम्हें सत्ययुग, त्रेता और द्वापर कुछ भी सूझ नहीं पड़ेगा
sañjaya uvāca | yuddhāyāpatatas tūrṇaṁ vāritān savyasācinā | na tadā bhavitā tretā na kṛtaṁ dvāparaṁ na ca ||
サンジャヤは言った。「戦へと疾く突き進む者たちが、サヴィヤサーチン(アルジュナ)によってたちまち制止されるのを汝が見るとき、汝は呆然として立ち尽くすであろう。その瞬間、トレーターの世も、クリタ(サティヤ)の世も、さらにはドヴァーパラの世さえ、汝の心には浮かばぬ。」
संजय उवाच