Udyoga-parva Adhyāya 137 — Bhīṣma–Droṇa Counsel and the Ethics of Restraint
ज्योतींषि प्रतिकूलानि दारुणा मृगपक्षिण: । उत्पाता विविधा वीर दृश्यन्ते क्षत्रनाशना:,“वीर! ग्रह और नक्षत्र प्रतिकूल हो रहे हैं। पशु और पक्षी भयंकर शब्द कर रहे हैं तथा नाना प्रकारके ऐसे उत्पात (अपशकुन) दिखायी देते हैं, जो क्षत्रियोंक विनाशकी सूचना देते हैं
「勇士よ。惑星も星宿も逆らい、獣も鳥も凄まじい声を上げている。さまざまな異変(凶兆)が現れ、クシャトリヤ滅亡を告げているのだ。」
वैशम्पायन उवाच