Vidurā–Putra Saṃvāda: Utsāha, Kīrti, and Kṣātra Resolve
Udyoga-parva 131
यत्र दानपतिं शूर॑ क्षुधिता: पृथिवीचरा: । प्राप्य तुष्टा: प्रतिष्ठन्ते धर्म: को5भ्यधिकस्तत:,भूतलपर विचरनेवाले भूखे मानव जहाँ दानपति, शूरवीर क्षत्रियके समीप पहुँचकर अन्न-पानसे पूर्णतः संतुष्ट हो अपने घरको जाते हैं, वहाँ उससे बढ़कर दूसरा धर्म क्या हो सकता है?
「大地をさまよう飢えた人々が、施しの主たる勇猛なるクシャトリヤのもとに至り、飲食によって満ち足り、喜びを得て家へ帰る――そこに、これを超えるダルマがどこにあろうか。」
वायुदेव उवाच