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Shloka 2

Vṛtra’s Cosmic Threat, Viṣṇu’s Upāya, and the Conditional Vulnerability

Udyoga-parva 10

समर्थों हाभवं पूर्वमसमर्थो5स्मि साम्प्रतम्‌ । कथं नु कार्य भद्ठं वो दुर्धर्ष: स हि मे मत:,पहले मैं सब प्रकारसे सामर्थ्यशाली था; किंतु इस समय असमर्थ हो गया हूँ। आपलोगोंका कल्याण हो। बताइये, कैसे क्या काम करना चाहिये? मुझे तो वृत्रासुर दुर्जय प्रतीत हो रहा है

かつてはあらゆることに堪能であったが、今は無力となってしまった。汝らに吉祥あれ。いかなる事を、いかにして為すべきか告げよ。わたしには、ヴリトラアスラはまことに討ち難き者と見える。

इन्द्र उवाच