Saṃsāra-gahana-jñāna: Vidura’s Account of Embodiment, Bondage, and Dharmic Release (संसारगहन-ज्ञानम्)
मूर्खानिति परानाह नात्मानं समवेक्षते | दोषान् क्षिपति चान्येषां नात्मानं शास्तुमिच्छति,वह दूसरोंको तो मूर्ख बताता है, पर अपनी ओर कभी नहीं देखता। दूसरोंके दोषोंके लिये उनपर आशक्षेप करता है, परंतु उन्हीं दोषोंसे स्वयंको बचानेके लिये अपने मनको काबूमें नहीं रखना चाहता
彼は他人を「愚か者」と呼びながら、自らを省みない。他人の दोष(過ち)を責め立てるが、同じ過ちから身を守るために自分の心を制し、己を戒めようとはしない。
विदुर उवाच