कि छिद्रंं को नु सड़ो मे कि वास्त्यविनिपातितम् । कुतो मामाश्रयेद् दोष इति नित्यं विचिन्तयेत्,मुझमें कौन-सी दुर्बलता है, किस तरहकी आसक्ति है और कौन-सी ऐसी बुराई है, जो अबतक दूर नहीं हुई है और किस कारणसे मुझपर दोष आता है? इन सब बातोंका राजाको सदा विचार करते रहना चाहिये
王は常に省みて思うべきである。「我にいかなる隙(ちぢり)と弱みがあるのか。いかなる執着があるのか。いまだ除かれぬ悪は何か。いかなる理由で咎が我に帰するのか。」
भीष्म उवाच