राष्ट्रगुप्ति-संग्रहः
Protection of the Realm and Principles of Revenue & Local Administration
नोच्छिन्द्यादात्मनो मूलं परेषां चापि तृष्णया,अधिक तृष्णाके कारण अपने जीवनके मूल आधार प्रजाओंके जीवनभूत खेती-बारी आदिका उच्छेद न कर डाले। राजा लोभके दरवाजोंको बंद करके ऐसा बने कि उसका दर्शन प्रजामात्रको प्रिय लगे। यदि राजा अधिक शोषण करनेवाला विख्यात हो जाय तो सारी प्रजा उससे द्वेष करने लगती है
nocchindyād ātmano mūlaṁ pareṣāṁ cāpi tṛṣṇayā
ビーシュマは言った。「渇望ゆえに、王は自らの安寧の根を断ってはならぬ。まして他者の根をも断ってはならぬ。過度の貪りに駆られて、農耕や生業といった民の命綱を滅ぼしてはならない。貪欲の門を閉ざし、ただその姿を仰ぐだけで万民が喜ぶ君主となれ。もし支配者が過酷な取り立てと搾取で悪名高くなれば、国中の民は彼を憎むようになる。」
भीष्म उवाच