आपद्धर्मे वैश्यवृत्तिः, विक्रय-निषेधाः, तथा ब्रह्म-क्षत्र-सम्बन्धः
Emergency Livelihood, Prohibited Trade, and Brahman–Kshatra Regulation
यदा भुवि जयी राजा क्षेमं राष्ट्रेडभिसंदधेत् । तदा वर्णा यथाधर्म निविशेयु: कथंचन,जब भूतलपर विजयी राजा अपने राष्ट्रमें कल्याणमय शासन स्थापित करना चाहता हो, तब उसे चाहिये कि जिस किसी प्रकारसे सभी वर्णके लोगोंको अपने-अपने धर्मका पालन करनेमें लगाये रखे
地上に勝利した王が国に安寧の政を打ち立てようとするなら、いかなる手立てをもってしても、あらゆるヴァルナの人々をそれぞれのダルマの履行にとどめねばならない。
भीष्म उवाच