Chapter 78: Royal Responsibility for Wealth, Social Order, and the Protection of Dvijas
Kekaya Exemplum
त्रीन् वर्णानुपजीवन्ति यथावदनसूयका: । मम शाूद्रा: स्वकर्मस्था मामकान्तरमाविश:,मेरे यहाँके शूद्र भी तीनों वर्णोकी यथावत् सेवासे जीवन-निर्वाह करते हैं तथा परदोषदर्शनसे दूर ही रहते हैं। इस प्रकार वे भी अपने कर्मोंमें ही स्थित हैं, तथापि तुम मेरे भीतर कैसे घुस आये?
ビーシュマは言った。「わが国のシュードラも、三つのヴァルナに正しく仕えて生を立て、他人の過失をあげつらうことから遠い。かくして彼らもまた自らの務めにとどまる。それでもなお—どうしておまえは私の内に入り込んだのか。」
भीष्म उवाच