राजधर्मः—प्रजापालनं दानयज्ञश्च
Royal Duty—Protection of Subjects, Generosity, and Sacrificial Discipline
अल्पं हि सारभूयिष्ठं यत् कर्मोदारमेव तत् । कृतमेवाकृताच्छेयो न पापीयो<स्त्यकर्मण:,कोई काम देखनेमें छोटा होनेपर भी यदि उसमें सार अधिक हो तो वह महान् ही है। न करनेकी अपेक्षा कुछ करना ही अच्छा है; क्योंकि कर्तव्य-कर्म न करनेवालेसे बढ़कर दूसरा कोई पापी नहीं है
たとえ小さく見える行いでも、そこに本質が多く宿るなら、それは大いなる業である。何もしないより、何かをなすほうがよい。なぜなら、なすべき務めをなさぬ者ほど罪深い者はいないからだ。
भीष्म उवाच