राजवृत्त-रक्षा-प्रणिधि-षाड्गुण्योपदेशः
Royal Conduct, Protection, Intelligence, and Policy Measures
एवमेव विना राज्ञा विनश्येयुरिमा: प्रजा: । अन्धे तमसि मज्जेयुरगोपा: पशवो यथा,राजन! जैसे सूर्य और चन्द्रमाका उदय न होनेपर समस्त प्राणी घोर अन्धकारमें डूब जाते हैं और एक-दूसरेको देख नहीं पाते हैं, जैसे थोड़े जलवाले तालाबमें मत्स्यगण तथा रक्षकरहित उपवनमें पक्षियोंके झुंड परस्पर एक-दूसरेपर बारंबार चोट करते हुए इच्छानुसार विचरण करते हैं, वे कभी तो अपने प्रहारसे दूसरोंको कुचलते और मथते हुए आगे बढ़ जाते हैं और कभी स्वयं दूसरेकी चोट खाकर व्याकुल हो उठते हैं। इस प्रकार आपसमें लड़ते हुए वे थोड़े ही दिनोंमें नष्टप्राय हो जाते हैं, इसमें संदेह नहीं है। इसी तरह राजाके बिना वे सारी प्रजाएँ आपसमें लड़-झगड़कर बात-की-बातमें नष्ट हो जायँगी और बिना चरवाहेके पशुओंकी भाँति दुःखके घोर अन्धकारमें डूब जायँगी
evam eva vinā rājñā vinaśyeyur imāḥ prajāḥ | andhe tamasi majjeyur agopāḥ paśavo yathā ||
ヴァスーマナーは言った。「まさにそのとおり、王なくばこの民は滅びる。牧者なき牛の群れのように、盲の闇へ沈むであろう。」
वसुमना उवाच