तस्माद् राजैव कर्तव्य: सततं भूतिमिच्छता । न धनार्थो न दारार्थस्तेषां येघामराजकम्,अतः सदा उन्नतिकी इच्छा रखनेवाले देशको अपनी रक्षाके लिये किसीको राजा अवश्य बना लेना चाहिये। जिनके देशमें अराजकता है, उनके धन और स्त्रियोंपर उन्हींका अधिकार बना रहे, यह सम्भव नहीं है
ゆえに、常に繁栄を望む者は、国土を守るため必ず王を立てねばならぬ。王なき国、すなわち無王の乱世においては、人々の財も女も、もとの持ち主の権利のままに保たれることはあり得ない。
भीष्म उवाच