Āśrama-dharma: Duties of the Four Life-Stages (आश्रमधर्मः)
षण्णामेकां पिबेद् धेनुं शताच्च मिथुन हरेत् । लब्धाच्च सप्तमं भागं तथा शृड्गे कलां खुरे,वैश्य यदि राजा या किसी दूसरेकी छः: दुधारू गौओंका एक वर्षतक पालन करे तो उनमेंसे एक गौका दूध वह स्वयं पीये (यही उसके लिये वेतन है)। यदि दूसरेकी एक सौ गौओंका वह पालन करे तो सालभरमें एक गाय और एक बैल मालिकसे वेतनके रूपमें ले ले। यदि उन पशुओंके दूध आदि बेचनेसे धन प्राप्त हो तो उसमें सातवाँ भाग वह अपने वेतनके रूपमें ग्रहण करे। सींग बेचनेसे जो धन मिले, उसमेंसे भी वह सातवाँ भाग ही ले; परंतु पशुविशेषका बहुमूल्य खुर बेचनेसे जो धन प्राप्त हो, उसका सोलहवाँ भाग ही उसे ग्रहण करना चाहिये
ṣaṇṇām ekāṃ pibed dhenuṃ śatāc ca mithunaṃ haret | labdhāc ca saptamaṃ bhāgaṃ tathā śṛṅge kalāṃ khure ||
ビーシュマは言った。「他人の乳牛六頭を一年間世話する者は、賃として一頭分の乳を飲んでよい。百頭を世話する者は、年の終わりに一対(牝牛一頭と牡牛一頭)を報酬として受け取ってよい。乳などを売って利益が出たなら、その七分の一を賃として取るべきであり、角を売った代金からも七分の一のみを取るべきである。だが、とりわけ高価な蹄を売った代金からは、十六分の一だけを取るべきである。このように牧人の賃は公正な割合で定められねばならない。貪りを避け、主人の財を守りつつ、働く者の生計もまた立てるためである。」
भीष्म उवाच