Āśrama-dharma: Duties of the Four Life-Stages (आश्रमधर्मः)
पितृवत् पालयेद् वैश्यो युक्त: सर्वान् पशूनिह । विकर्म तद् भवेदन्यत् कर्म यत् स समाचरेत्,वैश्य सदा उद्योगशील रहकर पुत्रोंकी रक्षा करनेवाले पिताके समान सब प्रकारके पशुओंका पालन करे। इन कर्मोंके सिवा वह और जो कुछ भी करेगा, वह उसके लिये विपरीत कर्म होगा
ビーシュマは言った。「ヴァイシャは常に勤勉であり、父が子を守るように、あらゆる家畜をよく養い守らねばならぬ。これら以外の仕事に手を染めるなら、それは彼にとって『ヴィカルマ』—本分に背く業—となる。」
भीष्म उवाच