Varṇa-dharma and Rājadharma: Yudhiṣṭhira’s Inquiry and Bhīṣma’s Normative Outline (वर्णधर्म-राजधर्म-प्रश्नोत्तरम्)
कल्पना विविधाश्वापि नूनागरथवाजिनाम् । व्यूहाश्नव विविधाभिख्या विचित्र युद्धकौशलम्,सेनाको पुष्ट करनेवाले अनेक प्रकारके योग, हाथी, घोड़ा, रथ और मनुष्य-सेनाकी भाँति-भाँतिकी व्यूह-रचना, नाना प्रकारके युद्धकौशल, जैसे ऊपर उछल जाना, नीचे झुककर अपनेको बचा लेना, सावधान होकर भलीभाँति युद्ध करना, कुशलतापूर्वक वहाँसे निकल भागना--इन सब उपायोंका भी इस ग्रन्थमें वर्णन है। भरतश्रेष्ठ! शस्त्रोंके संरक्षण और प्रयोगके ज्ञानका भी उसमें उल्लेख है
kalpanā vividhāś cāpi nūnā gaja-ratha-vājinām | vyūhāś caiva vividhākhyā vicitraṁ yuddha-kauśalam ||
ビーシュマは言った。「この論書はまた、軍を強めるための多くの戦術を説く。象・戦車・馬・歩兵の配列、名を持つ数多の陣形(vyūha)、そして巧緻多様な戦技—身を躍らせてかわすこと、身を低くして守ること、警戒と規律をもって戦うこと、危地より巧みに退くこと—である。さらに、武器を守り、正しく用いるための知も示している。」
भीष्म उवाच