Śara-śayyā-sthita-bhīṣma-saṃvāda-prastāvaḥ
The Prelude to Questioning Bhīṣma on the Bed of Arrows
प्राप्तकालं समाचक्षे भीष्मोडयमनुयुज्यताम् । अस्तमेति हि गाड़ेयो भानुमानिव भारत,॥ है ५ ह (शा (/ पल पा, >' के. ५ «4 छ हे / चहल 5/# 2. ः 673... की भगवान् श्रीकृष्णका देवर्षि नारद एवं पाण्डवोंको लेकर शरशय्यास्थित भीष्मके निकट गमन “भरतनन्दन युधिष्ठिर तथा अन्य भूपालगण! मैं आप लोगोंको समयोचित कर्तव्य बता रहा हूँ। आपलोग गड्ानन्दन भीष्मजीसे धर्म और ब्रह्मके विषयमें प्रश्न कीजिये, क्योंकि अब ये भगवान् सूर्यके समान अस्त होनेवाले हैं
prāptakālaṃ samācakṣe bhīṣmoḍayam anuyujyatām | astam eti hi gāḍeyo bhānumān iva bhārata ||
ヴァイシャンパーヤナは語った。「時はすでに熟した。矢の床に横たわるビーシュマに問いかけよ。彼はいま、輝く太陽が沈むように、終わりへと近づいているのだ、バーラタよ。」
वैशम्पायन उवाच