Kṛṣṇa’s Dhyāna and the Prompt to Question Bhīṣma (कृष्णध्यानं भीष्मप्रश्नप्रेरणा च)
निगृहीतो हि वायुस्ते पडचकर्मा शरीरग: । इन्द्रियाणि प्रसन्नानि मनसि स्थापितानि ते,आपके शरीरमें रहनेवाली और श्वास-प्रश्चास आदि पाँच कर्म करनेवाली प्राणवायु अवरुद्ध हो गयी है। आपने अपनी प्रसन्न इन्द्रियोंको मनमें स्थापित कर दिया है
nigṛhīto hi vāyus te pañcakarmā śarīragaḥ | indriyāṇi prasannāni manasi sthāpitāni te ||
ユディシュティラは言った。「あなたの身体に宿る生命の風(プラーナ)——吸気・呼気をはじめとする五つの働きをもつそれ——は、すでに抑え込まれております。あなたの感官は澄みわたり静まり、ひとつに収められて心のうちに据えられました。」
युधिछिर उवाच