Nārada’s Account of the Kaliṅga Svayaṃvara: Duryodhana’s Seizure and Karṇa’s Escort
अपन छा | क्र चतुथों5 ध्याय: कर्णकी सहायतासे समागत राजाओंको पराजित करके दुर्योधनद्वारा स्वयंवरसे कलिंगराजकी कन््याका अपहरण नारद उवाच कर्णस्तु समवाप्यैवमस्त्रं भार्गवनन्दनात् । दुर्योधनेन सहितो मुमुदे भरतर्षभ,नारदजी कहते हैं--भरतश्रेष्ठ! इस प्रकार भार्गवनन्दन परशुरामसे ब्रह्मासत्र पाकर कर्ण दुर्योधनके साथ आनन्दपूर्वक रहने लगा
Nārada uvāca — Karṇas tu samavāpyaivam astraṁ Bhārgavanandanāt | Duryodhanena sahito mumude Bharatarṣabha ||
ナーラダは言った。「バーラタ族の雄牛よ。かくしてブリグの子(パラシュラーマ)よりその武器を得たカルナは、ドゥルヨーダナと共に歓喜のうちに過ごした。」
नारद उवाच