Prāyaścitta-vidhāna: Tapas, Dāna, Vrata, and Proportional Expiation (प्रायश्चित्तविधानम्)
उपवासमेकरात्र दण्डोत्सगें नराधिप: । विशुद्धोदात्मशुद्धयर्थ त्रिरात्रं तु पुरोहित:,“यदि राजा दण्डनीय पुरुषको दण्ड न दे तो उसे अपनी शुद्धिके लिये एक रातका उपवास करना चाहिये। यदि पुरोहित राजाको ऐसे अवसरपर कर्तव्यका उपदेश न दे तो उसे तीन रातका उपवास करना चाहिये
もし王が罰すべき者を罰しないなら、自己の清浄のために一夜の断食をなすべきである。もし王の祭官(プローヒタ)がその折に王へ義務を諫めないなら、自己の清浄のために三夜の断食をなすべきである。
व्यास उवाच