Nāga-āyatana-darśana-pratīkṣā — The Brāhmaṇa’s Request and Waiting on the Gomatī
ऋषयश्च सगन्धर्वा यच्च किंचिच्चराचरम् | न ततो<स्ति परं मन्ये पावन दिवि चेह च,द्विजश्रेष्ठ] उन भगवान् नारायणका तेज अद्भुत है। मनुष्यके लिये उसकी ओर देखना भी कठिन है। कल्पके अन्तमें जिनके भीतर ब्रह्मा आदि सम्पूर्ण देवता, ऋषि, गन्धर्व तथा जो कुछ भी चराचर जगत् है, वह सब विलीन हो जाता है, उनसे बढ़कर परम पावन एवं महान् इस भूतल और स्वर्गलोकमें मैं दूसरे किसीको नहीं मानता
ṛṣayaś ca sa-gandharvā yac ca kiñcic carācaram | na tato 'sti paraṃ manye pāvanaṃ divi ceha ca ||
ジャナメージャヤは言った。「すべてのリシたち、ガンダルヴァたち、そして宇宙にある一切—動くものも動かぬものも—私の判断では彼に勝るものではない。天においてもこの地においても、かの唯一者よりさらに至上に浄める者を私は知らない。」
जनमेजय उवाच