धर्मद्वारबहुत्वविमर्शः — Reflection on the Many ‘Doors’ of Dharma (Śānti-parva 342)
प्रसादात् प्रादुरभवत् पद्म पद्मनिभेक्षण । ततो ब्रह्मा समभवत् स तस्यैव प्रसादज:,जब प्रलयकी रात व्यतीत हुई थी, उस समय उन अमित तेजस्वी अनिरुद्धकी कृपासे एक कमल प्रकट हुआ। कमलनयन अर्जुन! उसी कमलसे ब्रह्माजीका प्रादुर्भाव हुआ। वे ब्रह्मा भगवान् अनिरुद्धके प्रसादसे ही उत्पन्न हुए हैं
prasādāt prādurabhavat padma padmanibhekṣaṇa | tato brahmā samabhavat sa tasyaiva prasādajaḥ ||
アルジュナは言った。「その御恩寵によって蓮華が現れた、蓮華の眼をもつ御方よ。そこから梵天が顕現し、その梵天はただその御主の恩寵のみによって生まれたのだ。」
अर्जुन उवाच